Wednesday, 14 April 2010

मयखाने में 'डाकिया डाक लाया....'

लिखने वाले ने लिखा हम क्या लिखें ऐसे गीतों के बारे में । बस देख -सुन कर खुश हो लेते हैं और ब्लॉग -जगत में इन्हें बाँटनें का मकसद अपने हम-ख़याल दोस्तों को ढूंढना होता है । अगर ये गीत आपके दिल को ई-मेल के ज़माने में छू जाता है तो आप-हम हमखयाल हुए न .......हुए कि नहीं ? गाने के एक-एक लफ्ज़ में कुछ है ...कुछ तो है ...आखिर लिखा गुलज़ार ने है । सन ७७ ' में आई थी 'पलकों की छाओं में ' उसी का है !

4 comments:

  1. हम समझे के के यादव जी की कोई रचना ले आये.. :)

    वैसे विडियो चल नहीं रहा है...Eros Entertainments Blocked Contents..आ रहा है.

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  2. with all due respect...is gaane ki release ke sarvaadhikaar munish bhaai ke paas ,shaayad hi surakshit honge...yadi vdo nahi chal raha to gaane ki talab google baba ke madhyam se aur bhi tariko se buzhaai jaa sakti hai..:-))...gustaakhi maaf...

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