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Friday, 29 October 2010

पहाड़ संबंधी कुछ फुटकर , आम-फहम बातें :(२)

पहाड़ संबंधी आम बातों का सिलसिला आगे ले जाते हुए कांव -कांव पब्लिकेशन लिमिटेड के मालिक ब्लौगर 'अपूर्ण' ने अपनी टिप्पणियों के ज़रिये उनमें इज़ाफा किया है -- 1:युवक काम की तलाश में शहरों का रूख करते हैं , और घर पर रहते हैं माँ-बाप, पत्नी , बच्चे | पहाड़ों में बूढ़े, बच्चों और महिलाओं का प्रतिशत युवाओं से कहीं ज्यादा है | एक कहावत , पहाड़ का पानी और पहाड़ की जवानी पहाड़ के ही काम नहीं आती | 2:आज , पहाड़ी अपनी ही जमीन पर बने होटलों में बैरों का काम करता है | पहले कभी, पहाड़ियों को हमेशा फौज का लोलीपोप चूसने को दिया गया, गोया वे और कुछ नहीं कर सकते हों | 3:हम ११ चचेरे भाइयों में से २ कंप्यूटर प्रोग्रामर हैं | एक पंडिताई का पुश्तैनी राग अलाप रहा है | बाकी ८ या तो होटल में काम करते हैं , या सपना पाल रहे हैं | ये पहाड़ के हर घर की कहानी है | पहाड़ संबंधी मेरा ज्ञान सिर्फ एक यात्री जितना है सो उनकी इन बातों को आपसे साझा करना बनता था यदि पहाड़ संबंधी कुछ और बातें आप यहाँ बांटना चाहें तो स्वागत है

Friday, 11 June 2010

हिंदी सिनेमा के अमर मोटर साइकिल गीत -3

स्कूटर होता है , मोटर साइकिल होती है मग़र फिर फिर भी नायिकाएं इसी की सवारी पसंद करती आई हैं ऐसी कई गुमनाम ' ना-मालूम कहानियां जिनका ख़ुद ख़ाकसार नायक और चश्मदीद रहा है यही बतलाती हैं कि बाइक जो है बड़ी जोखिम की चीज़ है ! मतलब ,बीच रस्ते पंचर हो जाए तो स्कूटर जैसी स्टेपनी इसमें नहीं है और आम तौर पे १०० -१२५ cc वाली हिन्दुस्तानी बाइक के मुकाबले १५० cc का स्कूटर ज़्यादा ताक़तवर होता है . बाइक -प्रेम सच में बेवकूफ़ी और खतरों का बायस है ! मग़र , नायिका जो है वो तो खतरों की खिलाड़ी है ,उसे स्कूटर वाले से शादी भले मंज़ूर हो मग़र मोहब्बत....... क़तई नहीं !