Monday, 13 September 2010

आज हिंदी दिवस पर.....

एक विशाल , खिलखिलाते बाज़ार की इस भाषा को फलने-फूलने से कोई माई का लाल रोक नहीं सकता . दिल्ली और मुम्बई में हज़ारों रुपये प्रति घंटे देकर हिंदी सीखने वाले विदेशी भी हैं । बकौल हिंदुस्तान टाइम्स कटरीना कैफ ने २२,००० रुपय्ये प्रति घंटे देकर हिंदी सीखी ! मगर , हिंदी दिवस , हिंदी पखवाड़े और हिंदी माह को जाने क्या सोच - समझ कर ऐसे मौके पे तय पाया गया है जब हिंदी बोलने और नहीं भी बोलने वाले दोनों किस्म के हिन्दू अपने-अपने पुरखों के श्राद्ध-कर्म को अंजाम दे रहे होते हैं या देने की तय्यारी में होते हैं . लगे हाथों हिंदी का भी तर्पण हो जाया करता है :) वर्ना इस मुबारक मौके पे होने वाली किसी संगोष्ठी में कभी तो ये विचार किया गया होता कि हिंदी को सही मायने में लोकप्रिय बनाने वाले हिंदी सिनेमा के तमाम समारोह अंग्रेजी में ही क्यों होते हैं या हिंदी में बनी ९९ .९ फ़ीसदी फिल्मों के कास्टिंग -टाइटिल भी आज तक अंग्रेजी में ही क्यों दिखलाए जाते हैं ? या कॉमन -वेल्थ खेलों का साला एक भी बोर्ड हिंदी में क्यों नहीं है ?दरअसल , एक बाज़ार की भाषा के तौर पे तेज़ी से आगे बढ़ रही हिंदी राष्ट्रीय गर्व की भाषा बनने से अभी भी दूर है और आज की पीढी के बहुत से युवा तो रोमन लिपि में हिंदी लिखते दिखाई देते हैं . बहरहाल, देव नागरी को मुख्य धारा में बनाये रखने की मुहिम में हिंदी -ब्लौगिंग का वही योगदान है जो बोलचाल की हिंदी को इज़्ज़त बख्शने में श्री अमिताभ बच्चन का है ! मैं दोनों का इस खुशनुमा मौके पे तहे दिल से शुक्रिया अदा करता हूँ . आमीन !

8 comments:

  1. बहुत बढ़िया प्रस्तुति ....

    भाषा का सवाल सत्ता के साथ बदलता है.अंग्रेज़ी के साथ सत्ता की मौजूदगी हमेशा से रही है. उसे सुनाई ही अंग्रेज़ी पड़ती है और सत्ता चलाने के लिए उसे ज़रुरत भी अंग्रेज़ी की ही पड़ती है,
    हिंदी दिवस की शुभ कामनाएं

    एक बार इसे जरुर पढ़े, आपको पसंद आएगा :-
    (प्यारी सीता, मैं यहाँ खुश हूँ, आशा है तू भी ठीक होगी .....)
    http://thodamuskurakardekho.blogspot.com/2010/09/blog-post_14.html

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  2. सही कह रहे हैं जनाब।
    हिन्दी अभी भी दूर है।

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  3. saakaaratmak soch our utkrist post ke liye badhai.

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  4. बहुत बढ़िया प्रस्तुति ....

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  5. आपकी बातों से सहमत, लेकिन आपने कैटरीना कैफ़ का जो ज़िक्र किया है वो अगर इतने पैसे खर्च करके हिंदी सीख रही है तो वो हिंदी प्रेम नहीं बल्कि हिंदी बोलने में प्रवीणता पाकर करोड़ों कमाने की मजबूरी है।
    हिंदी ब्लॉगिंग चाहे कम मात्रा में ही सही, लेकिन हिंदी को प्रचारित प्रसारित कर रही है।
    आपके आमीन के साथ हमारा आमीन भी।

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  6. देव नागरी को मुख्य धारा में बनाये रखने की मुहिम में हिंदी -ब्लौगिंग का वही योगदान है जो बोलचाल की हिंदी को इज़्ज़त बख्शने में श्री अमिताभ बच्चन का है !

    -सही कह रहे हैं...


    हिन्दी के प्रचार, प्रसार में आपका योगदान सराहनीय है. हिन्दी दिवस पर आपका हार्दिक अभिनन्दन एवं साधुवाद!!

    सादर

    समीर लाल

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  7. One of the major hurdles in the growth of Hindi is our colonial hangover. Look at the matrimonial ads. and you will find a whole lot of men looking for "fair, convent-educated" girls. This also accounts for the success of fairness creams in our country. There is nothing wrong in learning English as it increases accessibility of knowledge, but there is everything wrong in considering it superior to Hindi.

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  8. भाई गजेन्द्र , महेंद्र,अरविन्द, नीरज , आप सम कौन, समीर जी एवं हामिद जी ,
    धन्यवाद आपका . जय हिंदी !

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