कोटद्वार से लैंसडाउन जाते वक्त एक जगह कण्वाश्रम भी है। कण्व ऋषि की कहानी तो मुझे नहीं पता लेकिन सुना है यहीं पर इंद्रदेव ने विश्वमित्र की तपस्या तोड़ने के लिये मेनका को भेजा था। मेनका की ही पुत्री थी शकुंतला जिसके पुत्र भारत के नाम पर इस देश का नाम भारत वर्ष हुआ। वैसे जब लैंसडाउन पहुंच जायें तो खिरसू ज़रूर जाना चाहिये। वहां के टूरिस्ट रेस्ट हाउस का भी नवीकरण हो चुका है। शानदार जगह है।
हिन्दी में विशिष्ट लेखन का आपका योगदान सराहनीय है. आपको साधुवाद!!
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