Wednesday, 10 February 2010

पिछली सदी की सबसे ऊंची, उम्दा कविता

कवि हृदय को कोमल बताया है साहित्य पंडितों ने , यार लोगों में भी हैं कवि ...उम्दा लिखते हैं , कवि-कर्म का मर्म जानते हैं लेकिन हैं वही कोमल -हृदय ; बुरा मान सकते हैं और ब्लोगरी करके भी बुराई ही मोल ली तो क्या सो टाइटिल में मामूली फेर करके कहना चाहूँगा 'गयी सदी की सबसे उम्दा फ़िल्मी चीज़ जो अब भी ताज़ा है जस की तस ' चुनांचे मोहब्बत और महंगाई अब तलक चल रहे हैं साथ..साथ ! मोहब्बत और महंगाई का ये अमर गान ...सुरों से सजाया है जानी बाबू कव्वाल, लता मंगेशकर, मुकेश और चंचल ने ! लिखा खुद मनोज कुमार का बताते हैं ..बहरहाल इसके आगे बीसवीं सदी का पूरा हिंदी फिल्म संगीत फीका है ..फोका है ..बेरंग है ..महंगाई और मोहब्बत दोनों साथ साथ चलते हैं यहाँ ठसके से , शाना--शाना , कितनी भी बार सुना जा सकता है इसको ये पुराना नहीं पड़ता मालिक , लोड हो जान दो पहले फिर सुनो बिना रुकावट के खेद के , मजा आयगा कसम से ..आज दुबारा लगा रया हूँ ईमान से !

5 comments:

  1. शानदार गाना । बहुत समय बाद सुना। मजा आ गया।

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  2. फिर से मस्त!! :)

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  3. सदा बहार गीत इसे ही कहते हैं.
    आपकी पसंद वाकई बेहतरीन है.

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