Friday, 12 February 2010

कभी गुस्सा तो कभी प्यार आता है मुझे अपने इस दुर्जेय ब्लौग -बोध पर

कई -कई दिन तक ब्लौगोद्यान में अत्यधिक रमण के उपरांत मन ...ये निरीह ,क्लांत मन विश्रांति चाहता है वो चाहता है कहीं दूर निकल जाना जहाँ कम्प्यूटर आदिक उपादानों की गंध छाया भी हो ,किन्तु अंततः परिणति होती ये है कि सुदूर वन-प्रांतर अथवा पर्वतांचल में भी वो अनजाने में पोस्ट ढूँढता है , स्कूप तलाशता है अपने उसी कमबखत ब्लौग के लिए कि जिससे दूर होकर शांति पाने के ही लिए तो वो सौ योजन तलक फटफटी घरघराता निकल आया है वो पहले भी वहां आया है मगर उसने कभी फोटू-फाटू नहीं खेंचे कम--कम कूड़े के ढेर के तो नहीं लेकिन ये क्या है जो उसे रमणीय स्थलों पर भी कूड़े में झाँकने को उकसाताहै ठीक सुसरे ऍन जी वाली बड़ी बिंदी वाली भैन्जियों और जींस ,कुरते वाले भाइयों की मानिंद अभी कल ही रात मेरा ध्यान अपने अन्दर रहे इस बदलाव पर गया और कभी खीज होती है तो कभी स्नेह आता है मुझे अपने ही इस ब्लौग -बोध पर मिसाल के तौर पे ये वो पोस्ट है जिसे पिछले नवम्बर में मैंने कबाड़-खाने में चेंपा था मगर अब सोचता हूँ कि ये मैंने क्या किया था ? क्या मेरा ये कृत्य सही है , निंदनीय है अथवा क्या है मुझे समझने के लिए तुम्हारी मदद चाहिए स्नेहिल पाठक /पाठिका ! अभी हाल ही में मोटर साइकिल भ्रमण करते हुए यमुनोत्री जाना हुआ था । कई अच्छे और ख़राब अनुभव रहे . अच्छे -अच्छे लिख चुका बैठ के मयखाने में और ख़राब ले के आ पसरा हूँ कबाड़ खाने में , इस उम्मीद में की कुछ सहानुभूति ही मिल-मिला जाए यार लोगों की ! फ़िर एक वरिष्ठ ब्लॉग-धर्मी भी इन दिनों बहुत कुछ लिख रहे हैं गंगा-घाट की सफाई और पिलाट्टिक के प्रबंधन के बारे में । उन्हें भी कहना चाहता हूँ के गंगा हो या जमना सब ऊपर से बहती हैं महाराज और ऊपर से ही पिलाट्टिक मय कर दी जाती हैं सो ये साफ़-सफाई अधूरी है । बहरहाल पैदल यात्रा मार्ग में प्लास्टिक के ऐसे-ऐसे कब्रगाह नज़र आए कि साँस अटकने को हो गयीं । अब पहले के मुकाबले चढाई का रास्ता पक्का ज़रूर कर दिया गया है और जगह-जगह डस्टबिन भी टांग दिए गए हैं मगर बावजूद इसके जो दिखा वो आप भी देख लें -- अगर आप धार्मिक हैं तो जान लीजिये कि शनि और यमराज की बहिन यमुना को गंदा करने का हश्र क्या होगा और अगर नास्तिक हैं तो भी आपको समझाना क्या , पर्यावरण की रक्षा का महत्व सभी के लिए है भाई और आइये मिल कर तै करें कि इस तरह नदियों को गंदा करने वालों का क्या इलाज होना चाहिए ।

9 comments:

  1. इस जन ब्लॉग /जन जागरण के लिए आपकी जितनी प्रशंसा की जाय कम है .

    ReplyDelete
  2. निसंदेह ऐसी पोस्टें आनी चाहिए

    ReplyDelete
  3. सहमत हैं आपसे पिलाट्टिक तो लगता है पिछा नही छोड़ने वाली।इससे पीछा छुड़ाना पड़ेगा और इस दिशा मे आपका प्रयास सराहनीय है।हम आपके साथ हैं।

    ReplyDelete
  4. " सुसरे ऍन जी ओ वाली बड़ी बिंदी वाली भैन्जियों और जींस ,कुरते वाले भाइयों की मानिंद "
    चलो कोई एक और भी मेरी तरह सोचता है :)

    ReplyDelete
  5. मुनीश जी, आज तो पूरी पोस्ट मे कूडा ही कूडा ही छाया हुआ है.

    ReplyDelete
  6. Although the C.M.of Uttarakhand has declared his govt.'s intention to make the State polythene free, but it needs public awareness and support. We are sacrificing our planet for the sake of convenience and comfort. Sane voices like yours are definitely important for creating this awareness.

    ReplyDelete
  7. पोस्ट और चित्रों ने सारी बात कह दी. स्थिति इतनी दुखद है कि अनदेखी हो नहीं सकती. दुःख इस बात का है कि मैया को पूजने वाले भी मैया की ह्त्या में उतने ही शामिल हैं जितने मैय्या के दोहक और रक्षक.

    ReplyDelete
  8. इस ब्लौग-बोध को सलाम सर जी।

    ReplyDelete