Sunday, 19 April 2009

क्यों ब्लॉग-बन्धु क्या ख़याल है

संगीत के सुर सात हैं , प्रकाश में रंग सात हैं , हफ्ते के दिन भी सात हैं और सप्तरिशी तारामंडल के सदस्य भी सात ही हैं मगर इनमें से कोई वजह हमें मजबूर नहीं करती कि हमारी प्रस्तावित यात्रा का मकाम भी सात ताल हो ! लेकिन चूंकि हमारे अनुरोध पर भाई अशोक पाण्डे से प्राप्त सूची में इसका नाम सबसे ऊपर है सो तै ये पाया गया है कि तम्बू अब वहीं गढेगा . ऐतिहासिक कोटि के इस सामूहिक प्रयास को एक बढ़िया सा नाम देना लाज़मी हो जाता है . अभी टेम्पोरेरी तौर पर मैंने इसे नाम दिया है --'मिशन सप्त-सरोवर' . दिल्ली से मात्र ३२५ किलो मीटर पे वाके सात-ताल जाने को मिशन या अभियान कहना हँसी का बायस हो सकता है मगर जिस उत्साह से ब्लॉग -बन्धु इसमें जुड़ रहे हैं और जिस शिद्दत से ब्लॉग को ''वर्बल -डायरिया '' की चेपी से बचाने की ये कोशिश हो रही है उसके मद्दे-नज़र ये वाकई अभियान है , एक ओपरेशन है , एक मिशन है ! अब सवाल ये है कि क्या आप इसमें साथ है ? ये यात्रा तो होगी चाहे जो हो . आपसे अनुरोध है मित्रो कि इस अभियान को एक अच्छा सा नाम दें . रवानगी २४ जून भोर चार बजे दिल्ली से , दिन बुधवार .

15 comments:

  1. आपका मिशन खूब सफल हो, शुभकामनाएं।

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  2. Thanx mr. Singh ,pls keep in touch here.

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  3. आप लोगो का मिशन यानी यात्रा सफ़ल हो।शुभकामनाएं।

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  4. ब्लॉगर मस्ती की अद्भुत मिसाल होगा ये अभियान! इस अभूतपूर्व अभियान का नाम...
    हम्म... थोडा वक़्त दीजिये!

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  5. This comment has been removed by the author.

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  6. Anil bhai u were the first one to comment when i floated the idea and i thank u again ,but pls. keep coming to chk the progress here.

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  7. बाबू जी ! कई दिन जे काम का झाम देख रिया हूँ. नाम भी बढ़िया धर लिया गया है. टीम की कोई लिमिट तो ना है ? सप्त सरोवर बहुत दूर ना है इस बंदे के ठिकाने से, सोच रिया हूँ का करूँ भय्यन ?

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  8. Delji walon ki to mauj ho gayi. Asha hai aapka abhiyaan rang layega

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  9. आपका "सप्त -सरोवर अभियान / यात्रा " सफल हो मुनीश भाई !
    - लावण्या

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  10. इरफ़ान रस्ते से भटक गया दिक्खे. अच्छा भला मुनीस बाबू बिलागरमण्डल को एक नया रस्ता दिखलाने का परजास कर रये थे कि गन्दे गाने सुनाने वाले हमारे भूतपूर्व-अजीज इरफ़ान उर्फ़ इफ़्फ़न घुरमामारकण्डवी ने 'मिशन सप्त-सरोवर' की ऐसी तैसी फ़ेरते हुए उस पर मेल चाऊनिज़ाम का इश्टीकर चिपका दिया.

    देखिए मेलों के चाऊनिज़ाम से हमें कोई मल्लब ना था. ना हैगा. ना रएगा.

    इफ़्फ़न की इन लातों से घुटनों घुटनों चोटिल मूनीस बाबू ने फ़ून पर मुझे जब इस कारजस्थानी की तफ़सीलातें बयान कीं तो कलैजा ऐसाबैसा हो गया लगने को होईय्याया!

    अब जा के मैंने और मूनीस भाई ने तय किया है कि हम लोग चाऊनिज़ाम मेल का इश्टीकर लगाने को भौत बड़ी बेज्जती समझ के फ़ाइनली अपना डेस्टीनेशन बदल रये हैं.

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  11. nayaa डेस्टीनेशन ?

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  12. हाँ शायद बोर्ची बाबे को यही मंज़ूर है अशोक भाई। भाई सिद्धेश्वर ,लावण्या जी एवम तमाम मित्रों की मंगल कामनाओं का शुक्रिया । खैर अशोक भाई इरफान चाहे जो कह गया हो हमें उसे उसकी नादानियों के लिए मुआफ कर देना चाहिए । हाँ, इस ट्रिप पर तो उसकी पोस्ट ने पानी फेर ही डाला है। लगता है वो फेमिनिस्ट लॉबी को इम्प्रेस कर चुका है ।

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  13. Thanx Vineeta jee , lets see what happens!

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