Tuesday, 20 May 2008

चित्रमाला --बुरी नज़र वाले मुंह काला

धरती जो अपनी हो कर भी अपनी कहाँ है?
पानियों में बह रहे हैं कई किनारे टूटे हुए .....
तारे ज़मीं पर : निशात की फूल भरी घास पर लोटते हुए मयखान्वी टूलिप के खेत चश्म-ऐ-शाही में दो चश्मे धारी Two Tramps शंकराचार्या - हिल आकाशवाणी नहीं........ रेडियो कश्मीर चिनार कभी यहीं स्वर्ग था ....... चरागाह
  • शीर्षक आप दें........

8 comments:

  1. खूब मजा ले रहे हैं गुरु.

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  2. रास्तों में मिल गए हैं सभी सहारे छूटे हुए !!![ :-)] -

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  3. चलिये चित्र को माला तो मिली. लेकिन दिख नही रही?

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  4. वाह! बड़ी सुहानी सैर है, कहाँ की है भाई. बेहतरीन चित्र.

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  5. YE KASHMEER HAI SAMIR JI !

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  6. YE KASHMEER HAI SAMIR JI !

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  7. वाह! आपकी मार्फत कश्मीर दर्शन हुए. अन्यथा तो कब मौका लगे, कौन जाने. बहुत आभार.

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  8. "Ready to jump "आपने शीर्षक पुछा इसलिये मैने दे दिया !!

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