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Friday, 2 December 2011

मयखाने में प्यारी लैला...ओ लैला

ये उन दिनों की बात है जब हिंदी फ़िल्मों का हर विलेन और कभी-कभार बिगड़ैल हीरो भी लंदन से पढ़ कर आया करता था और ख़लील फ़ाख़्ता उड़ाया करे थे ।मुझे नहीं लगता कि दुनिया की किसी और फ़िलिम इंडस्ट्री ने इतने लंदन एजुकेटेड विलेन दिये हैं जितने बंबई ने । इन्हीं में से एक हैं प्रेम चोपड़ा जिन्होंने पर्दे पर कमीनेपन को नए सोपान दिए । बहरहाल,आज लगता है कि एक इनोसेंस थी साहब प्रेम बाबू की काइयाँपने से लबरेज़ स्टाइल में भी क्योंकि आज की दुनिया तो उनके भी बापों से भरी है ।बंबई से निकलने वाले टाइम्स ऑफ़ इंडिया के इस मुलाज़िम ने नौकरी और फ़िल्में एक अर्से तक साथ-साथ कीं और बहुत बाद में उपकार में लीड विलेन का रोल मिलने पर ही नौकरी छोड़ी । लाहौर की पैदाइश, शिमला में पले-बढ़े और पंजाब यूनिवर्सिटी में पढ़े इस कलाकार को मैख़ाने की तरफ़ से सैल्यूट । आखिरी मर्तबा फ़िल्म बंटी और बबली में एक सिक्ख ड्राइवर की प्यारी भूमिका में इन्हें देखा था ।खैर, मैं नृत्य गीतों का कोई पारखी नहीं लेकिन यहाँ तो एक अलग ही अंदाज़ है इस कलाकार का एकदम फुल टू झक्कास। फ़िल्म वचन का ये गीत वीएचएस अपलोड है सो शुरूआती प्रिंट की गड़बड़ी को कीजिए नज़रअंदाज़ । बड़ी मुश्किल से मिला है । देखिए और झूमिए इस अजब-गजब गीत पर । क्यों जी आपका क्या कैना है..