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Saturday, 4 February 2012
बजरंग बाण
भूत- प्रेत, पिशाच, वेताल, जिन्न और ग्रहों की उल्टी चाल आदि तभी तक नहीं हैं जब तक उनसे पाला न पड़े ।
ईश्वर न करे कभी पड़े लेकिन कभी पड़ ही जाए तो इसका प्रेम पूर्वक पाठ एवम् श्रवण रक्षा कारी बताया गया है और ऐसा है भी । ये मेरा व्यक्तिगत अनुभव है सो आपसे बाँटना बनता है । खुद ना तो भगवद्-भक्ति के लायक हूँ , ना ही आचार-विचार शुद्ध है लेकिन केवल और केवल प्रभु की कृपा से गाड़ी चल रही है और ये कहने में कोई संकोच नहीं है । प्रभु श्री राम का नाम लेते हुए आनंद लें बंधुओं ।
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